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परिवार में इकलौती बेटी है, तो यहां मिलेगी मुफ्त में शिक्षा
उज्जैन | केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की गाइड लाइन के अनुसार परिवार में एक बेटी होने पर सिर्फ केंद्रीय विद्यालयों में उसकी पढ़ाई निशुल्क है। सीबीएसई से संबद्धता प्राप्त अन्य निजी स्कूलों में यह अनिवार्य नहीं है। यह स्कूल के विवेक पर निर्भर करता है कि वह बालिका की फीस ले या नहीं। निजी स्कूल को इसके लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।
दरअसल पिछले कुछ दिनों से यह जानकारी सामने आ रही थी कि जिसके परिवार में एक या दो बेटियां हैं, सीबीएसई स्कूलों में उन्हें फीस में रियायत मिलेगी। पहली बेटी की पूरी और दूसरी बेटी की आधी माफ होगी। साथ ही यह भी बताया गया कि यह निर्देश सीबीएसई की अधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड भी हो गया है। सोशल मीडिया पर भी यह पोस्ट वायरल हो रही थी। नया शैक्षणिक सत्र शुरू होते ही कई अभिभावक निजी स्कूलों में इसके लिए पहुंचने लगे, लेकिन वहां उन्हें सीबीएसई की ओर निर्देश नहीं मिलने की बात कही गई। उन्हें बताया गया कि यह सिर्फ केंद्रीय विद्यालयों के लिए है। इस पर अभिभावकों ने आपत्ति भी जताई। इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी संजय गोयल ने बताया कि निजी स्कूलों को फीस माफ करना अनिवार्य नहीं है। वे चाहें तो फीस माफ कर सकते हैं। वहीं केंद्रीय विद्यालय प्राचार्य एबी पांडे का कहना है कि कक्षा ६ठीं से १२वीं तक की इकलौती बालिकाओं को यह लाभ दिया जा रहा है। पत्रिका ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अजमेर स्थित क्षेत्रीय कार्यालय के टेलीफोन नंबर ०१४५२६३४११२ पर बात की तो वहां से भी यहीं बताया गया कि हर सीबीएसई स्कूल में इकलौती बालिकाओं को मुफ्त शिक्षा देने का अनिवार्य नियम नहीं है। सिर्फ केंद्रीय विद्यालयों के लिए यह अनिवार्य है।
यह है अधिसूचना
सीबीएसई की अधिकारिक वेबसाइट पर सचिव की ओर से अधिसूचना जारी की गई है। इसके अंतर्गत परिपत्र सं. केमाशिबो/५२७५९०-५३२९३९/२००६ दिनांक २२.०३.२००६ के अनुसार सभी केंद्रीय विद्यालय कक्षा ६ठीं से १२वीं तक इकलौती बालिका को (भोजन और परिवहन को छोड़कर) शुल्क का अधित्याग जारी रखेंगे। स्वतंत्र/प्राइवेट स्कूल रियायत/शुल्क अधित्याग प्रदान करने के लिए विचार कर सकते हैं। यह समझा जा सकता है कि यद्यपि स्वतंत्र/निजी स्कूलों के लिए बाध्यता नहीं है, परंतु वे अपने शुल्क अधित्याग कर सकते हैं।